
ए हवा तू किस शहर से आती है ?
क्यों तेरी हर लहर से उसकी महक आती है .
सबकुछ महफूज़ करने की मेरी तमाम कोशिशे ,
उस एक झोंके से फिर से बिखर जाती है .
मेरी खुशनुमा जिंदगी सिहर उठती है उस पल,
जब तेरे कण कण से उसकी बददुआ की बू आती है
क्या फिर से उसने दी है मुझे बर्बाद होने की दुआ ?
क्यों तेरी हर लहर से मुझे खंजर की बू आती है .
बहुत सधे हुए शब्द .... सशक्त भावनाओ के साथ ..... गहरी भावनाओ को व्यक्त करती .. सुन्दर अभिव्यक्ती है ...... लिखती रहे ..... कलम में धार के लिए बधाई
ReplyDeleteआपकी सुन्दर रचना पढ़ी, सुन्दर भावाभिव्यक्ति , शुभकामनाएं.
ReplyDeleteकृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने की अनुकम्पा करें.
क्यों तेरी हर लहर से मुझे खंजर की बू आती है
ReplyDeleteवाह ..बेजोड़ भावाभिव्यक्ति...बधाई स्वीकारें
नीरज
ए हवा तू किस शहर से आती है ?
ReplyDeleteक्यों तेरी हर लहर से उसकी महक आती है.....
pori kavita prabhvit karti hai.
ए हवा तू किस शहर से आती है ?
ReplyDeleteक्यों तेरी हर लहर से उसकी महक आती है .
आपने पूरे दिल से शब्द सजोये हैं और इसलिए अहसास दिल तक पहुँच रहे हैं.
सुन्दर भावपूर्ण अहसास से मन मग्न हो
ReplyDeleteगया है...मंजुला जी
very nice post, i certainly love this website, keep on it
ReplyDeleteFrom Computer Addict
ब्लॉगजगत की कुछ कवयित्रियों ने एकाध ब्लॉग अपना तनाव बांटने के लिए ही चला रखा है। मैं उम्मीद करता हूं कि आपकी अगली कविताओं में कुछ अन्य धाराएं भी देखने को मिलेंगी।
ReplyDeleteक्या फिर से उसने दी है मुझे बर्बाद होने की दुआ ?
ReplyDeleteक्यों तेरी हर लहर से मुझे खंजर की बू आती है ...
बहुत खूब ... कमाल का बोध है इस शेर में ... लाजवाब सोच ..
BAHUT UMDA RACHNA , KAMAL KER GAYI AAPKI ANUPAM PRASTUTI
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना, सुन्दर भावाभिव्यक्ति , बधाई.
ReplyDeleteकृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें, प्रतीक्षा रहेगी .
ए हवा तू किस शहर से आती है ?
ReplyDeletebada pyara sambodhan hai hawa ko.....
dil ki baat..uske ahsas sundar shabdo mein
ReplyDeleteWelcome to मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली
हवा जो भी लाये , पर सुकून देती है ! लाजबाब
ReplyDeleteवाह खुबसूरत रचना
ReplyDelete(अरुन = www.arunsblog.in)
bahut sunder.
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