
ए हवा तू किस शहर से आती है ?
क्यों तेरी हर लहर से उसकी महक आती है .
सबकुछ महफूज़ करने की मेरी तमाम कोशिशे ,
उस एक झोंके से फिर से बिखर जाती है .
मेरी खुशनुमा जिंदगी सिहर उठती है उस पल,
जब तेरे कण कण से उसकी बददुआ की बू आती है
क्या फिर से उसने दी है मुझे बर्बाद होने की दुआ ?
क्यों तेरी हर लहर से मुझे खंजर की बू आती है .