खुश रहना
सच बोलना
दूशरो की मदद करना
नम्रता
जो है उसमे खुश रहना
दयालू होना
ये सब मनुष्य के स्वभाबविक गुण है
कोई धर्म या किताबो से सिखने की चीज़ नहीं .
चलिए मनुष्य बने
इन गुणों को खुद मै वापस जिंदा करे
हजरों लोगो से रोज़ मिलना जिंदगी का हिस्सा है कभी तन्हाई मे खुद से भी मिलना अच्छा लगता है .
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khud ko khojne ka safar
Friday, April 30, 2010
Tuesday, March 23, 2010
Wednesday, March 17, 2010
एक प्यास सदा इंसान के साथ रहती है,
कुछ पा लेने की कुछ बन जाने की ,
कुछ अलग दिखने की अलग करने की,
आम से ख़ास बन सकने की प्यास,
कभी मारती है कभी जिन्दा रखती ,
बहुत अजीब सी होती है ये प्यास,
कुछ पा कर और कुछ पाने की प्यास ,
अगर ये न हो तो रुक जाता है हार जाता है इंसान ,
कभी प्यार ,कभी नफरत ,कभी दोस्त कभी दुश्मन सी
जीवन भर साथ चली ये प्यास.
कुछ पा लेने की कुछ बन जाने की ,
कुछ अलग दिखने की अलग करने की,
आम से ख़ास बन सकने की प्यास,
कभी मारती है कभी जिन्दा रखती ,
बहुत अजीब सी होती है ये प्यास,
कुछ पा कर और कुछ पाने की प्यास ,
अगर ये न हो तो रुक जाता है हार जाता है इंसान ,
कभी प्यार ,कभी नफरत ,कभी दोस्त कभी दुश्मन सी
जीवन भर साथ चली ये प्यास.
Monday, March 30, 2009
भीड़ के बिच मे चलते चलते बहुत दूर निकल आये थे,
जाना कहीं और था कहीं और चले आये थे,
दूर दूर तक फैला है अनजान सा सन्नाटा ,
कहाँ गए वो सभी जो चले मेरे साथ थे?
बहुत याद आती है माँ के आँचल की छाव,
भाइयों से लड़ना झगड़ना वो खेलना वो रूठना
बहुत मुस्किल है पाना वापस वही अपनापन और प्यार ,
मशीन जैसा हो चूका आज का इंसान है ,
जाना कहीं और था कहीं और चले आये थे,
दूर दूर तक फैला है अनजान सा सन्नाटा ,
कहाँ गए वो सभी जो चले मेरे साथ थे?
बहुत याद आती है माँ के आँचल की छाव,
भाइयों से लड़ना झगड़ना वो खेलना वो रूठना
बहुत मुस्किल है पाना वापस वही अपनापन और प्यार ,
मशीन जैसा हो चूका आज का इंसान है ,
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